बोल

बोल के अर्थ :

बोल के हरियाणवी अर्थ

संज्ञा, पुल्लिंग

  • वचन
  • बुलाने या पुकारने का भाव - अपणे भाई नैं बोल दिये
  • पुकार, आर्त पुकार
  • पशु-पक्षी को दुत्कारने के लिए उत्पन्न शब्द - अरै बोलिए इन डाँगरौँ नै कित भीत्तर बड़ते आवैं सै
  • गाना, मीठा गाना - दाद्दा लखमी! सुणा दे दो बोल हार उतरै
  • प्यार भरे वचन-दो बोल बोल लेत्ता तै के होत्ता
  • व्यंग्योक्ति (तुल. कचोद) - इसनैं इसे बोल मार राक्खे सैं अक ठाए ना ऊठ्ठ्
  • स्वभाव, मिथन- हमनैं तेरे बोल का ए बेरा ना पाट्या
  • बोलने या बातचीत करने का ढंग
  • स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य- आज काल्ह उसका बोल ठीक सै के ना?
  • बोली, भाषा - पार के लोग्गाँ के बोल पै हँस्सी क्यूँ नाँ आवेगी जिब वे पतले नैं 'पतरा' और कुत्याँ नैं 'कुत्तेन' कहँघे
  • संदेश-उसनैं तेरी खात्तर (लिए) बी दो बोल भेज्जे सैं
  • पशु-पक्षियों की बोली
  • मैथुन-क्रिया, 15 प्राण, जीवतत्त्व, जैसे- बोल लीकड़णा (प्राणांत होना), 16 लय, स्वर- दोन्वाँ के बोल मिल्ल तै रागनी जम्मैं, 17. कहावत या कहत-बोल मैं तै न्यूँ आवै सै अक बाँग्गर के छोहरे तगड़े हूँ सैं, 18. आज्ञा, आदेश - आच्छे मा-बाप्पाँ के बाळक सदा उनकी बोल मैं

सकर्मक क्रिया

  • 'बोलणा' क्रिया का आदे. रूप

संज्ञा, स्त्रीलिंग

  • वायल का कपड़ा
  • एक प्रकार की ओढ़नी

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