कूट

कूट के अर्थ :

कूट के हरियाणवी अर्थ

संज्ञा, पुल्लिंग

  • अस्पष्ट या अटपटी उक्ति, वह उक्ति जिसका अर्थ जल्दी स्पष्ट न हो- अझा (बकरी) सहेली (भेड़) ताहि रिपु (भुरट) ता जननी (भूमि) भरतार (इन्द्र) ताके सुत (अर्जुन) के मीत (श्रीकृष्ण) को भज ले बारम्बार

सकर्मक क्रिया

  • 'कूटणा' क्रिया का आदे.

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