साँग

साँग के अर्थ :

साँग के हरियाणवी अर्थ

संज्ञा, स्त्रीलिंग

  • एक प्रकार की बछ, तलवार
  • लोहे की लंबी नुकीली कील - के तेरै न्यारी ए साँग लाग गी जो न्यूँ अरड़ावै सै?

संज्ञा, पुल्लिंग

  • लोक नाट्य जिसमें नाच, संगीत और कवित्व की धारा प्रवाहित होती है (नकल, भगत, नौटंकी, तमाशा, माँच, भवाई, भाँड पाथेर, जात्रा, विदेशिया, भंडौती, छाऊ, नृत्य, कीर्तनिया, यज्ञगान आदि साँग के अन्य पर्यायवाची शब्द भारत के विभिन्न प्रदेशों में प्रचलित हैं)
  • भेस, रूप, बनावटी रूप
  • तमाशा

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