साँझी

साँझी के अर्थ :

  • स्रोत - संस्कृत
  • देखिए - साँजी

साँझी के हरियाणवी अर्थ

संज्ञा, स्त्रीलिंग

  • संध्या की देवी जिसे आश्विन के प्रथम नवरात्र के दिन गोबर तथा मिट्टी के सितारों की सहायता से स्त्री के रूप में दीवार पर चीता जाता है तथा मिट्टी के रंगीन आभूषणों से सजाया जाता है, (संध्या या रात के समय लड़कियाँ इसकी स्तुति में गीत गाती हैं तथा भोग लगाकर पूजत

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