शतपथ

शतपथ के अर्थ :

  • स्रोत - संस्कृत

शतपथ के हिंदी अर्थ

विशेषण

  • असंख्य मार्गों वाला, बहुत से मार्गों वाला
  • बहुत सी शाखाओं वाला

संज्ञा, पुल्लिंग

  • यजुर्वेद का एक ब्राह्मण

    विशेष
    . इसके कर्ता महर्षि याज्ञवल्कय माने जाते हैं। इसकी माध्यंदिन और काण्व शाखाएँ मिलती हैं। इनमें से पहली की विशेष प्रतिष्ठा है। एक प्रणाली के अनुसार इसमें 68 प्रपाठक हैं, और दूसरी के अनुसार यह 14 कांड़ों और 100 अध्यायों में विभक्त है। चारों ब्राह्मणों में से यह अधिक क्रमपूर्ण और रोचक है। इसमें अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेध पर्यंत कर्मकांड का बड़ा विशद और सुंदर वर्णन है।

शतपथ के ब्रज अर्थ

विशेषण

  • असंख्य मार्गों वाला, अनेक सखाओं वाला

शतपथ के हरियाणवी अर्थ

संज्ञा, पुल्लिंग

  • दे. सतपत

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